श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  8.27.26-27h 
सुशर्माणं सुसंक्रुद्धो जत्रुदेशे समाहनत्।
तत: संशप्तका: सर्वे परिवार्य धनंजयम्॥ २६॥
शस्त्रौघैर्ममृदु: क्रुद्धा नादयन्तो दिशो दश।
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त अर्जुन ने अत्यन्त कुपित होकर सुशर्मा की गर्दन पर गहरा घाव कर दिया। तब क्रोध में भरे हुए समस्त संशप्तकगण अपनी गर्जना से दसों दिशाओं को गुंजायमान करते हुए अर्जुन को चारों ओर से घेरकर अपने अस्त्र-शस्त्रों से उसे पीड़ा पहुँचाने लगे॥ 26 1/2॥
 
Also, Arjuna, being extremely enraged, inflicted a deep wound on the collarbone of Susharma's neck. Then all the Samshaptakas filled with anger, echoing with their roars in all the ten directions, surrounded Arjuna from all sides and started tormenting him with their weapons.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)