श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.27.25 
ततो रजतपुङ्खेन राजञ्शीर्षं महात्मन:।
मित्रदेवस्य चिच्छेद क्षुरप्रेण महारथ:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब रजत पंखधारी महारथी धनंजय ने महान मित्रदेव का सिर काट डाला॥25॥
 
Rajan! Then the great charioteer Dhananjaya, having the silver wing, cut off the head of the great Mitradev. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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