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mahabharat 8.27.21-22: कुन्तीकुमार के महारथी अर्जुन ने श्रीकृष्ण को घायल देखकर तीखे बाणों द्वारा सत्यसेन को रोक लिया और सेना के मध्य में कुण्डलों से विभूषित उस राजकुमार का विशाल मस्तक तीक्ष्ण धार वाले गदा से काट डाला। 21-22॥   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  8.27.21-22 
विष्वक्सेनं तु निर्भिन्नं दृष्ट्वा पार्थो धनंजय:।
सत्यसेनं शरैस्तीक्ष्णैर्वारयित्वा महारथ:॥ २१॥
तत: सुनिशितैर्भल्लै राज्ञस्तस्य महच्छिर:।
कुण्डलोपचितं कायाच्चकर्त पृतनान्तरे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार के महारथी अर्जुन ने श्रीकृष्ण को घायल देखकर तीखे बाणों द्वारा सत्यसेन को रोक लिया और सेना के मध्य में कुण्डलों से विभूषित उस राजकुमार का विशाल मस्तक तीक्ष्ण धार वाले गदा से काट डाला। 21-22॥
 
Kuntikumar's master charioteer Arjuna, seeing Shri Krishna injured, stopped Satyasen with sharp arrows and cut off the great head of that prince, decorated with earrings, in the middle of the army with a sharp-edged club. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)