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mahabharat 8.27.14: महाराज! इसी प्रकार उसने विजय के लिए प्रयत्नशील अन्य योद्धाओं को भी पाँच-पाँच बाण मारकर रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.27.14 
तथेतरान् महाराज यतमानान् महारथान्।
पञ्चभि: पञ्चभिर्बाणैरेकैकं प्रत्यवारयत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इसी प्रकार उसने विजय के लिए प्रयत्नशील अन्य योद्धाओं को भी पाँच-पाँच बाण मारकर रोक दिया।
 
Maharaj! In the same way, he stopped the other warriors striving for victory by shooting five arrows at each of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)