Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.27.12-13: फिर उसने सान पर तीखे किए हुए अनेक बाणों से राजा श्रुतंजय को मार डाला और सौश्रुति का मस्तक तथा मुकुट धड़ से अलग कर दिया। फिर तुरन्त ही उसने चन्द्रदेव को भी अपने बाणों से यमलोक भेज दिया॥12-13॥ | mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुतंजयं च राजानं हत्वा तत्र शिलाशितै:॥ १२॥
सौश्रुते: सशिरस्त्राणं शिर: कायादपाहरत्।
त्वरितश्चन्द्रदेवं च शरैर्निन्ये यमक्षयम्॥ १३॥
अनुवाद
फिर उसने सान पर तीखे किए हुए अनेक बाणों से राजा श्रुतंजय को मार डाला और सौश्रुति का मस्तक तथा मुकुट धड़ से अलग कर दिया। फिर तुरन्त ही उसने चन्द्रदेव को भी अपने बाणों से यमलोक भेज दिया॥12-13॥
Then he killed King Shrutanjay with many arrows sharpened on a whetstone and severed Saushruti's head along with his helmet from the body. Then immediately he sent Chandradev also to Yamaloka with his arrows.॥ 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥