श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  8.27.11-12h 
श्रुतंजयं च विंशत्या चन्द्रदेवं तथाष्टभि:।
मित्रदेवं शतेनैव श्रुतसेनं त्रिभि: शरै:॥ ११॥
नवभिर्मित्रवर्माणं सुशर्माणं तथाष्टभि:।
 
 
अनुवाद
श्रुतंजय बीस बाणों से, चन्द्रदेव आठ बाणों से, मित्रदेव सौ बाणों से, श्रुतसेन (चित्रसेन) तीन बाणों से, मित्रवर्मा नौ बाणों से और सुशर्मा आठ बाणों से घायल हो गए ॥11 1/2॥
 
Shrutanjaya was wounded with twenty arrows, Chandradev with eight, Mitradev with a hundred, Shrutsen (Chitrasen) with three, Mitravarma with nine and Susharma with eight arrows. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)