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mahabharat 8.26.32-d1h: एक दूसरे को बुरी तरह घायल करके वे दोनों महारथी रक्त से नहा उठे, मानो उन्होंने रक्त के सरोवर में बार-बार डुबकी लगाई हो।   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 32-d1h
 
 
श्लोक  8.26.32-d1h 
तावन्योन्यं भृशं विद्‍ध्वा रुधिरेण समुक्षितौ॥ ३२॥
(पोप्लूयमानौ हि यथा महान्तौ शोणितह्रदे।)
 
 
अनुवाद
एक दूसरे को बुरी तरह घायल करके वे दोनों महारथी रक्त से नहा उठे, मानो उन्होंने रक्त के सरोवर में बार-बार डुबकी लगाई हो।
 
Having wounded each other very severely, both those great warriors were bathed in blood, as if they had taken a repeated dip in a lake of blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)