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mahabharat 8.26.25-26h: हे राजन! फिर उसने स्वर्ण पंख वाले नब्बे तीखे बाण छोड़े, किन्तु वे कृतवर्मा के कवच से फिसलकर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.26.25-26h 
ततोऽस्य नवतिं बाणान् रुक्मपुङ्खान् सुतेजनान्॥ २५॥
प्रेषयामास राजेन्द्र तेऽस्याभ्रश्यन्त वर्मण:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! फिर उसने स्वर्ण पंख वाले नब्बे तीखे बाण छोड़े, किन्तु वे कृतवर्मा के कवच से फिसलकर गिर पड़े।
 
King! Then he shot ninety sharp arrows with golden feathers, but they slipped off Kritavarma's armour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)