Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.26.24-25h: तत्पश्चात् द्रुपद के बलवान पुत्र ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर कृतवर्मा से क्रोधित होकर कहा - 'अरे! स्थिर रहो, स्थिर रहो' ॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.26.24-25h 
अथान्यद् धनुरादाय द्रुपदस्यात्मजो बली॥ २४॥
तिष्ठ तिष्ठेति संक्रुद्धो हार्दिक्यं प्रत्यभाषत।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रुपद के बलवान पुत्र ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर कृतवर्मा से क्रोधित होकर कहा - 'अरे! स्थिर रहो, स्थिर रहो' ॥24 1/2॥
 
After that, Drupada's strong son took the second bow in his hand and said angrily to Kritavarma - 'Hey! Stand still, stand still' 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)