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mahabharat 8.26.20-21h: शत्रुओं का नाश करने वाले कृपाचार्य ने बार-बार शंख बजाकर धृष्टद्युम्न को उसी प्रकार भयभीत कर दिया, जैसे इन्द्र ने नमुचि को भयभीत किया था।   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  8.26.20-21h 
शङ्खं च पूरयामास मुहुर्मुहुररिंदम:॥ २०॥
पार्षतं त्रासयामास महेन्द्रो नमुचिं यथा।
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का नाश करने वाले कृपाचार्य ने बार-बार शंख बजाकर धृष्टद्युम्न को उसी प्रकार भयभीत कर दिया, जैसे इन्द्र ने नमुचि को भयभीत किया था।
 
The destroyer of enemies, Krupacharya, blew his conch repeatedly and frightened Dhrishtadyumna just as Indra had frightened Namuchi. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)