Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.26.15-16: राजन! यह सुनकर धृष्टद्युम्न ने धीरे से कहा - 'सारथी! मेरा मन प्रेम से विह्वल हो रहा है और शरीर पसीने से तर हो रहा है। मेरे सारे अंग काँप रहे हैं और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।' 15-16. | mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृष्टद्युम्नस्ततो राजन् शनकैरब्रवीद् वच:॥ १५॥
मुह्यते मे मनस्तात गात्रस्वेदश्च जायते।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च सारथे॥ १६॥
अनुवाद
राजन! यह सुनकर धृष्टद्युम्न ने धीरे से कहा - 'सारथी! मेरा मन प्रेम से विह्वल हो रहा है और शरीर पसीने से तर हो रहा है। मेरे सारे अंग काँप रहे हैं और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।' 15-16.
King! Hearing this, Dhrishtadyumna said softly - 'Charioteer! My mind is getting overwhelmed with love and my body is sweating. All my limbs are trembling and I am feeling goosebumps. 15-16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥