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mahabharat 8.26.13-14h: द्विजश्रेष्ठ कृपाचार्य ने सब ओर से आपके अन्तःकरण को लक्ष्य करके बाण चलाए थे; परन्तु भाग्यवश वे बाण आपके हृदयस्थानों को नहीं लगे ॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  8.26.13-14h 
दैवयोगात्तु ते बाणा नापतन् मर्मभेदिन:॥ १३॥
प्रेषिता द्विजमुख्येन मर्माण्युद्दिश्य सर्वत:।
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ कृपाचार्य ने सब ओर से आपके अन्तःकरण को लक्ष्य करके बाण चलाए थे; परन्तु भाग्यवश वे बाण आपके हृदयस्थानों को नहीं लगे ॥13 1/2॥
 
‘Dwijashrestha Kripacharya had fired arrows from all sides aiming at your innermost places; But by sheer luck those piercing arrows did not hit your heart's places. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)