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दैवयोगात्तु ते बाणा नापतन् मर्मभेदिन:॥ १३॥
प्रेषिता द्विजमुख्येन मर्माण्युद्दिश्य सर्वत:।
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ कृपाचार्य ने सब ओर से आपके अन्तःकरण को लक्ष्य करके बाण चलाए थे; परन्तु भाग्यवश वे बाण आपके हृदयस्थानों को नहीं लगे ॥13 1/2॥
‘Dwijashrestha Kripacharya had fired arrows from all sides aiming at your innermost places; But by sheer luck those piercing arrows did not hit your heart's places. 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥