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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  8.26.12-13h 
तमब्र्रवीत्ततो यन्ता कच्चित् क्षेमं तु पार्षत॥ १२॥
ईदृशं व्यसनं युद्धे न ते दृष्टं मया क्वचित्।
 
 
अनुवाद
तब उसके सारथी ने उससे कहा, "द्रुपदपुत्र, क्या तुम कुशल से हो? युद्ध में मैंने तुम्हें ऐसी विपत्ति में पड़ते कभी नहीं देखा।"
 
Then his charioteer said to him, 'Son of Drupada, are you well? I have never seen you face such a calamity in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)