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mahabharat 8.26.10-11h: तत्पश्चात् शरद्वान् के पुत्र कृपाचार्य ने क्रोधपूर्वक आह भरी और निश्चल खड़े हुए धृष्टद्युम्न के समस्त अंगों को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई ॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  8.26.10-11h 
विनि:श्वस्य तत: क्रोधात् कृप: शारद्वतो नृप॥ १०॥
पार्षतं चार्दयामास निश्चेष्टं सर्वमर्मसु।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शरद्वान् के पुत्र कृपाचार्य ने क्रोधपूर्वक आह भरी और निश्चल खड़े हुए धृष्टद्युम्न के समस्त अंगों को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई ॥10 1/2॥
 
Nareshwar! Thereafter, Kripacharya, the son of Sharadvan, heaved a sigh of anger and deeply hurt Dhrishtadyumna, who was standing motionless, in all his vital parts. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)