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mahabharat 8.26.1: संजय बोले: हे राजन! जब कृपाचार्य ने धृष्टद्युम्न को आक्रमण करते देखा, तब उन्होंने उसे युद्धभूमि में आगे बढ़ने से वैसे ही रोक दिया, जैसे वन में शरभ नामक सिंह को रोक दिया जाता है।   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.26.1 
संजय उवाच
धृष्टद्युम्नं कृपो राजन् वारयामास संयुगे।
यथा दृष्ट्वा वने सिंहं शरभो वारयेद् युधि॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले: हे राजन! जब कृपाचार्य ने धृष्टद्युम्न को आक्रमण करते देखा, तब उन्होंने उसे युद्धभूमि में आगे बढ़ने से वैसे ही रोक दिया, जैसे वन में शरभ नामक सिंह को रोक दिया जाता है।
 
Sanjaya said: O King! When Krupacharya saw Dhrishtadyumna attacking him, he stopped him from advancing in the battlefield just as one stops Sharabha the lion in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)