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mahabharat 8.25.7: महाराज! ध्वज-स्तंभ के कटते ही युयुत्सु का विशाल स्वर्ण ध्वज टुकड़े-टुकड़े होकर उसके सामने गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.25.7 
सच्छिन्नयष्टि: सुमहान् शीर्यमाणो महाध्वज:।
पपात प्रमुखे राजन् युयुत्सो: काञ्चनध्वज:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ध्वज-स्तंभ के कटते ही युयुत्सु का विशाल स्वर्ण ध्वज टुकड़े-टुकड़े होकर उसके सामने गिर पड़ा।
 
King! When the flag pole was cut, Yuyutsu's huge golden flag broke into pieces and fell in front of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)