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mahabharat 8.25.42-43h: महामनस्वी शकुनि ने उन महाबाहुओं को, जो अभिमान से भरे हुए थे, मार भगाया। यह सब हमने अपनी आँखों से देखा।   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  8.25.42-43h 
तान्यनीकानि दृप्तानि शस्त्रवन्ति महान्ति च॥ ४२॥
द्राव्यमाणान्यदृश्यन्त सौबलेन महात्मना।
 
 
अनुवाद
महामनस्वी शकुनि ने उन महाबाहुओं को, जो अभिमान से भरे हुए थे, मार भगाया। यह सब हमने अपनी आँखों से देखा।
 
The great-minded Shakuni drove away those great armed soldiers who were full of pride. We saw all this with our own eyes. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)