श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  8.25.40-41h 
सुतसोमस्ततोऽगच्छच्छ्रुतकीर्तेर्महारथम्।
सौबलोऽपि धनुर्गृह्य घोरमन्यत् सुदुर्जयम्॥ ४०॥
अभ्ययात् पाण्डवानीकं निघ्नञ्शत्रुगणान् बहून्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुतसोम श्रुतकीर्ति के विशाल रथ पर सवार हुए। इसी बीच शकुनि ने भी एक और अत्यंत दुर्जय और भयंकर धनुष उठाया और अनेक शत्रुओं का संहार करता हुआ पांडव सेना की ओर चल पड़ा।
 
Thereafter Sutasoma boarded Shrutkirti's huge chariot. Meanwhile Shakuni too took another extremely difficult to conquer and dreadful bow and headed towards the Pandava army killing many enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)