श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.25.4 
तदपास्य धनुश्छिन्नं युयुत्सुर्वेगवत्तरम्।
अन्यदादत्त सुमहच्चापं संरक्तलोचन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
टूटे हुए धनुष को फेंककर क्रोध से लाल आँखें किए हुए युयुत्सु ने दूसरा अत्यंत शक्तिशाली और विशाल धनुष हाथ में ले लिया ॥4॥
 
Throwing away the broken bow, Yuyutsu, his eyes turning red with anger, took up another extremely powerful and huge bow in his hand. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)