Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.25.34: महाराज ! इससे शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सुबलपुत्र शकुनि अत्यन्त क्रोधित हो उठे और सुतसोम पर विषैले सर्पों के समान बाणों की वर्षा करने लगे ॥34॥ | mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: क्रुद्धो महाराज सौबल: परवीरहा।
प्राहिणोत् सुतसोमाय शरानाशीविषोपमान्॥ ३४॥
अनुवाद
महाराज ! इससे शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सुबलपुत्र शकुनि अत्यन्त क्रोधित हो उठे और सुतसोम पर विषैले सर्पों के समान बाणों की वर्षा करने लगे ॥34॥
Maharaj! Due to this, Shakuni, the son of Subala, who killed the enemy warriors, became very angry. He started raining arrows like poisonous snakes on Sutasoma. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥