श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.25.31 
सोऽचरत् सहसा खड्गी मण्डलानि समन्तत:।
चतुर्दश महाराज शिक्षाबलसमन्वित:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सुतसोम विद्या और बल दोनों से संपन्न थे। वे अचानक हाथ में तलवार लेकर युद्धभूमि में घूमकर उसकी चौदह कलाएँ दिखाने लगे।
 
Maharaj! Sutasoma was blessed with both education and strength. Taking the sword in his hand he suddenly started roaming all over the battlefield showing its fourteen manoeuvres.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)