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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.25.29 
स च्छिन्नधन्वा विरथ: खड्गमुद्यम्य चानदत्।
वैदूर्योत्पलवर्णाभं दन्तिदन्तमयत्सरुम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
रथ तो पहले ही नष्ट हो चुका था और जब धनुष भी कट गया, तब सुतसोम ने अपनी तलवार उठाई, जो वैदूर्य मणि और नील कमल के समान श्याम वर्ण की थी और जिसका मूठ हाथी के दाँत का बना हुआ था, और जोर से गर्जना की।
 
The chariot had already been destroyed and when the bow too was cut, then Sutasoma raised his sword, which was dark in colour like vaidurya gem and blue lotus and had a hilt made of elephant's tooth and roared loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)