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mahabharat 8.25.26-27: पैदल चलने वाले सुतसोम रथ पर बैठे हुए शकुनि के साथ युद्ध कर रहे थे। उनके इस अविश्वसनीय एवं अद्भुत कार्य को देखकर वहाँ खड़े सभी योद्धा तथा आकाश में स्थित सिद्धगण भी अत्यन्त संतुष्ट हुए।   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  8.25.26-27 
तत्रातुष्यन्त योधाश्च सिद्धाश्चापि दिवि स्थिता:॥ २६॥
सुतसोमस्य तत् कर्म दृष्ट्वा श्रद्धेयमद्भुतम्।
रथस्थं शकुनिं यस्तु पदाति: समयोधयत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
पैदल चलने वाले सुतसोम रथ पर बैठे हुए शकुनि के साथ युद्ध कर रहे थे। उनके इस अविश्वसनीय एवं अद्भुत कार्य को देखकर वहाँ खड़े सभी योद्धा तथा आकाश में स्थित सिद्धगण भी अत्यन्त संतुष्ट हुए।
 
Sutasoma, who was on foot, was fighting with Shakuni who was sitting on a chariot. Seeing this unbelievable and wonderful act of his, all the warriors standing there and the Siddhas situated in the sky were also very satisfied. 26-27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)