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mahabharat 8.25.24: फिर उसने स्वर्ण पंख से तीखे हुए अनेक बाण शिला पर चलाए और उन बाणों से युद्धभूमि में तुम्हारे बहनोई के रथ को ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.25.24 
व्यसृजत् सायकांश्चैव स्वर्णपुङ्खान् शिलाशितान्।
छादयामास समरे तव स्यालस्य तं रथम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने स्वर्ण पंख से तीखे हुए अनेक बाण शिला पर चलाए और उन बाणों से युद्धभूमि में तुम्हारे बहनोई के रथ को ढक दिया।
 
Then he shot many arrows sharpened with golden feathers on the rock. With those arrows he covered the chariot of your brother-in-law in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)