श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  8.25.20-21 
ताञ्शराञ्शकुनिस्तूर्णं चिच्छेदान्यै: पतत्रिभि:।
लघ्वस्त्रश्चित्रयोधी च जितकाशी च संयुगे॥ २०॥
निवार्य समरे चापि शरांस्तान् निशितै: शरै:।
आजघान सुसंक्रुद्ध: सुतसोमं त्रिभि: शरै:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
परन्तु शकुनि ने तुरन्त ही अन्य बाणों से सुतसोम के बाणों को काट डाला। वह अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण, विचित्र युद्ध-विद्या में निपुण और युद्धभूमि में विजय से विभूषित था। उसने युद्धभूमि में अपने तीखे बाणों से सुतसोम के बाणों को रोक दिया और अत्यन्त क्रोधित होकर उसने तीन बाणों से सुतसोम को घायल कर दिया।
 
But Shakuni immediately cut off Sutasoma's arrows with other arrows. He was quick to wield weapons, skilled in strange warfare and adorned with victory on the battlefield. He warded off Sutasoma's arrows with his sharp arrows in the battlefield and being very angry, he wounded Sutasoma with three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)