श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.25.16 
तावुभौ विरथौ वीरौ कुरूणां कीर्तिवर्धनौ।
व्यपाक्रमेतां युद्धात्तु प्रेक्षमाणौ परस्परम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कुरुकुल की कीर्ति बढ़ाने वाले वे दोनों वीर रथहीन होकर एक-दूसरे को देखकर युद्धभूमि से दूर चले गए॥16॥
 
Those two heroes who had increased the fame of Kurukula, being chariotless, looked at each other and moved away from the battlefield. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)