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mahabharat 8.25.1: संजय कहते हैं- महाराज! उधर युयुत्सु आपके पुत्र की विशाल सेना को भगा रहा था। यह देखकर उल्लू तुरन्त वहाँ आया और युयुत्सु से बोला- 'अरे! रुको, रुको'॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.25.1 
संजय उवाच
युयुत्सुं तव पुत्रस्य द्रावयन्तं बलं महत्।
उलूको न्यपतत्तूर्णं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! उधर युयुत्सु आपके पुत्र की विशाल सेना को भगा रहा था। यह देखकर उल्लू तुरन्त वहाँ आया और युयुत्सु से बोला- 'अरे! रुको, रुको'॥1॥
 
Sanjaya says- Maharaj! On the other side Yuyutsu was chasing away your son's huge army. Seeing this, the owl immediately came there and said to Yuyutsu- 'Hey! Stand still, stand still'॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)