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mahabharat 8.24.75: रणभूमि में कर्ण के बाण बाणों पर प्रहार करते हुए भी कर्ण की ओर उसी प्रकार बढ़ते रहते थे, जैसे पतंगे अग्नि पर आक्रमण करते हैं ॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  8.24.75 
ते वध्यमाना: समरे सूतपुत्रेण सृञ्जया:।
तमेवाभिमुखं यान्ति पतङ्गा इव पावकम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में कर्ण के बाण बाणों पर प्रहार करते हुए भी कर्ण की ओर उसी प्रकार बढ़ते रहते थे, जैसे पतंगे अग्नि पर आक्रमण करते हैं ॥ 75॥
 
Even as Karna's arrows were striking the arrows in the battlefield, they kept moving towards Karna just like moths attack the fire. ॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)