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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  8.24.66-67 
प्रासै: खड्गैश्च रहितानृष्टिभिश्चापि भारत।
हयसादीनपश्याम कञ्चुकोष्णीषधारिण:॥ ६६॥
निहतान् वध्यमानांश्च वेपमानांश्च भारत।
नानाङ्गावयवैर्हीनांस्तत्र तत्रैव भारत॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
भारत! हमने कवच और पगड़ी पहने कई घुड़सवारों को बिना भाले, तलवार और बर्छी जैसे हथियारों के मारे हुए देखा। कर्ण के बाणों से घायल होकर कई काँप रहे थे और कई शरीर के विभिन्न अंगों के बिना इधर-उधर मृत पड़े थे।
 
Bhaarat! We saw many horsemen wearing armour and turbans killed without weapons like spear, sword and spear. Many were trembling after being hit by Karna's arrows and many were lying dead here and there without various parts of their bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)