श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  8.24.59-60 
भिन्नकुम्भार्द्ररुधिराश्छिन्नहस्ताश्च वारणा:॥ ५९॥
छिन्नगात्रावराश्चैव च्छिन्नवालधयोऽपरे।
छिन्नाभ्राणीव सम्पेतुर्हन्यमाना महात्मना॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
बहुत से हाथियों के माथे फट गए और वे रक्त से लथपथ हो गए। बहुत से हाथियों की सूँड़ कट गई, बहुत से हाथियों के कवच टूट गए, बहुत से हाथियों की पूँछ कट गई और बहुत से हाथी महामनस्वी कर्ण के प्रहार से छिन्न-भिन्न बादलों के समान पृथ्वी पर गिर पड़े।
 
Many elephants' foreheads were torn and were soaked in blood. Many had their trunks cut off, many had their armour torn to pieces, many had their tails cut off and many elephants fell to the earth like shattered clouds after being struck by the great-minded Karna. 59-60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)