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mahabharat 8.24.58-59h: बहुत से मदमस्त हाथी बड़ी घबराहट में इधर-उधर घूम रहे थे, मानो किसी विशाल जंगल में लगी दावानल से उनके सारे शरीर झुलस गए हों। 58 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  8.24.58-59h 
तत्र तत्र च सम्भ्रान्ता विचेरुर्मत्तकुञ्जरा:॥ ५८॥
दावाग्निपरिदग्धाङ्गा यथैव स्युर्महावने।
 
 
अनुवाद
बहुत से मदमस्त हाथी बड़ी घबराहट में इधर-उधर घूम रहे थे, मानो किसी विशाल जंगल में लगी दावानल से उनके सारे शरीर झुलस गए हों। 58 1/2
 
Many drunken elephants were roaming around in great panic, as if their whole bodies had been scorched by a forest fire in a huge jungle. 58 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)