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mahabharat 8.24.53: सारथीपुत्र से पीड़ित होकर नकुल घड़े में फंसे हुए सर्प की भाँति जोर-जोर से आहें भरते हुए युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गए।   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.24.53 
आरुरोह रथं चापि सूतपुत्रप्रतापित:।
नि:श्वसन् दु:खसंतप्त: कुम्भस्थ इव पन्नग:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
सारथीपुत्र से पीड़ित होकर नकुल घड़े में फंसे हुए सर्प की भाँति जोर-जोर से आहें भरते हुए युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गए।
 
Tormented by the son of a charioteer, Nakula boarded Yudhishthira's chariot, sighing profusely like a serpent trapped in a pot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)