श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  8.24.5-6 
एवमुक्त: प्रत्युवाच नकुलं सूतनन्दन:।
सदृशं राजपुत्रस्य धन्विनश्च विशेषत:॥ ५॥
प्रहरस्व च मे वीर पश्यामस्तव पौरुषम्।
कर्म कृत्वा रणे शूर तत: कत्थितुमर्हसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नकुल के ऐसा कहने पर सूतनंदन कर्ण ने उनसे कहा- 'वीर! तुम मुझ पर राजकुमार के समान, विशेषकर धनुर्विद्या से युक्त योद्धा के समान आक्रमण करो। हम तुम्हारा पराक्रम देखेंगे। वीर! पहले युद्धभूमि में अपना पराक्रम दिखाओ, फिर उसका बखान करो।॥ 5-6॥
 
On Nakula's saying this, Sutanandan Karna said to him- 'Valiant! You attack me in a manner befitting a prince, especially a warrior with an archery. We will see your prowess. Brave! First you should display your valour on the battlefield and then you should boast about it.॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)