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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार
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श्लोक 43-44h
श्लोक
8.24.43-44h
व्यायुधं चैनमालक्ष्य शरै: संनतपर्वभि:॥ ४३॥
आर्पयद् बहुभि: कर्णो न चैनं समपीडयत्।
अनुवाद
उन्हें निहत्था देखकर कर्ण ने बहुत से मुड़े हुए बाणों से उन्हें और भी घायल कर दिया, परन्तु उन्हें प्राणघातक पीड़ा नहीं पहुँचाई ॥ 43 1/2 ॥
Seeing them unarmed, Karna wounded them further with a large number of arrows having bent ends, but did not inflict fatal pain on them. ॥ 43 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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