श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  8.24.41-42h 
हताश्वो विरथश्चैव विवर्मा च विशाम्पते॥ ४१॥
अवतीर्य रथात्तूर्णं परिघं गृह्य धिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
हे प्रजा की रक्षा करने वाले राजा! जब उनके घोड़े, रथ और कवच नष्ट हो गए, तब नकुल तुरन्त रथ से उतरकर हाथ में परिघ लेकर खड़े हो गए॥41 1/2॥
 
O King who protects his subjects! When his horses, chariot and armour were destroyed, Nakul immediately got down from the chariot and stood there holding a Parigha in his hand. ॥ 41 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)