Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.24.37: उस महारथी के गिरते हुए बाणों के कारण वहाँ की सभी वस्तुएँ घोर अंधकार में डूब गईं। जैसे घने बादल छा जाने पर सब कुछ अंधकारमय हो जाता है॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.24.37 
एकच्छायमभूत् सर्वं तस्य बाणैर्महात्मन:।
अभ्रच्छायेव संजज्ञे सम्पतद्भि: शरोत्तमै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस महारथी के गिरते हुए बाणों के कारण वहाँ की सभी वस्तुएँ घोर अंधकार में डूब गईं। जैसे घने बादल छा जाने पर सब कुछ अंधकारमय हो जाता है॥ 37॥
 
Due to the falling arrows of that great warrior, everything there got immersed in complete darkness. Just like when a thick cloud gathers, darkness engulfs everything.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)