Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.24.36: माननीय महोदय! तत्पश्चात् सारथीपुत्र ने जोर से हंसकर युद्धभूमि में पुनः बाणों का जाल बिछा दिया और सैकड़ों-हजारों बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.24.36 
तत: प्रहस्याधिरथि: शरजालानि मारिष।
प्रेषयामास समरे शतशोऽथ सहस्रश:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय! तत्पश्चात् सारथीपुत्र ने जोर से हंसकर युद्धभूमि में पुनः बाणों का जाल बिछा दिया और सैकड़ों-हजारों बाण छोड़े।
 
Honorable Sir! Thereafter, the son of a charioteer laughed loudly and again spread a net of arrows in the battlefield. He shot hundreds and thousands of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)