Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.24.35: महाराज! सारथिपुत्र द्वारा पूर्णतया आवृत होने पर भी नकुल के मन में लेशमात्र भी पीड़ा नहीं हुई, जैसे बादलों से ढके हुए सूर्य के मन में लेशमात्र भी पीड़ा नहीं हुई॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.24.35 
सोऽतिच्छन्नो महाराज सूतपुत्रेण पाण्डव:।
न चकार व्यथां राजन् भास्करो जलदैर्यथा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सारथिपुत्र द्वारा पूर्णतया आवृत होने पर भी नकुल के मन में लेशमात्र भी पीड़ा नहीं हुई, जैसे बादलों से ढके हुए सूर्य के मन में लेशमात्र भी पीड़ा नहीं हुई॥35॥
 
Maharaj! Even after being completely covered by the son of a charioteer, Nakula, like the Sun covered by clouds, did not feel the slightest pain in his mind. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)