श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  8.24.31-32 
नकुलेन शरा मुक्ता: कङ्कबर्हिणवासस:।
सूतपुत्रमवच्छाद्य व्यतिष्ठन्त यथाम्बरे॥ ३१॥
तथैव सूतपुत्रेण प्रेषिता: परमाहवे।
पाण्डुपुत्रमवच्छाद्य व्यतिष्ठन्ताम्बरे शरा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
नकुल के बाणों में कंक और मयूर के पंख लगे हुए थे। जैसे वे धनुष से छूटने पर सूतपुत्र को ढँककर आकाश में ही रह जाते थे, वैसे ही उस महायुद्ध में सूतपुत्र के छोड़े हुए बाण पाण्डुपुत्र नकुल को ढँककर आकाश में ही रह जाते थे। ॥31-32॥
 
Nakula's arrows were fitted with feathers of Kank and Peacock. Just as they used to cover Suta's son after being released from his bow and remain in the sky, similarly, in that great war, the arrows shot by Suta's son used to cover Pandu's son Nakula and remain in the sky. ॥31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)