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mahabharat 8.24.21: तत्पश्चात् आकाश में बाणों का जाल सा दिखाई दिया, मानो जुगनुओं के झुंड वहाँ उड़ रहे हों ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.24.21 
ततो बाणमयं जालं विततं व्योम्नि दृश्यते।
खद्योतानामिव व्रातै: सम्पतद्भिर्यथा नभ:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आकाश में बाणों का जाल सा दिखाई दिया, मानो जुगनुओं के झुंड वहाँ उड़ रहे हों ॥21॥
 
Thereafter a net of arrows appeared in the sky, as if flocks of fireflies were flying there. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)