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mahabharat 8.24.15: माननीय महोदय, पाण्डुपुत्र नकुल द्वारा कर्ण को इस प्रकार कष्ट देते देख देवताओं सहित समस्त महारथियों को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.24.15 
कर्णमभ्यर्दितं दृष्ट्वा पाण्डुपुत्रेण मारिष।
विस्मयं परमं जग्मू रथिन: सह दैवतै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय, पाण्डुपुत्र नकुल द्वारा कर्ण को इस प्रकार कष्ट देते देख देवताओं सहित समस्त महारथियों को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥15॥
 
Honorable Sir, on seeing Karna being tormented in this manner by Pandu's son Nakula, all the charioteers including the gods were greatly astonished. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)