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mahabharat 8.24.12: तत्पश्चात् नकुल ने दूसरा दुर्जय धनुष उठाया, जिसकी पृष्ठिका स्वर्णमयी थी, और उसने कर्ण को सत्तर बाणों से तथा उसके सारथि को तीन बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 24: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.24.12 
अथान्यद् धनुरादाय हेमपृष्ठं दुरासदम्।
कर्णं विव्याध सप्तत्या सारथिं च त्रिभि: शरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् नकुल ने दूसरा दुर्जय धनुष उठाया, जिसकी पृष्ठिका स्वर्णमयी थी, और उसने कर्ण को सत्तर बाणों से तथा उसके सारथि को तीन बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter Nakula took up another Durjaya bow having a golden back and wounded Karna with seventy arrows and his charioteer with three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)