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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 23: सहदेवके द्वारा दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.23.7 
समार्गणगुणं चापं छित्त्वा तस्य महानसि:।
निपपात ततो भूमौ च्युत: सर्प इवाम्बरात्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसकी लम्बी तलवार ने दुशासन के धनुष, बाण और प्रत्यंचा को काट डाला और वह आकाश से खोए हुए सर्प की भाँति पृथ्वी पर गिर पड़ा।
 
His long sword cut off Dushasan's bow, arrow and string and fell to the earth like a serpent lost from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)