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mahabharat 8.22.6: हे भरतपुत्र! धृष्टद्युम्न ने दस, छह और आठ बाणों से उन पर्वताकार हाथियों को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.22.6 
एकैकं दशभि: षड्‍‍भिरष्टाभिरपि भारत।
द्विरदानभिविव्याध क्षिप्तैर्गिरिनिभान् शरै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! धृष्टद्युम्न ने दस, छह और आठ बाणों से उन पर्वताकार हाथियों को घायल कर दिया।
 
O son of Bharata! Dhrishtadyumna wounded each of those mountain-sized elephants with ten, six and eight arrows shot by him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)