Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.22.5: वे सर्प समस्त शत्रु सेना को कुचलने की इच्छा से एड़ी, पैर के अंगूठे और अंकुश से प्रहार करके बार-बार आगे बढ़ रहे थे। यह देखकर द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने उन पर नाराच नामक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। | mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे सर्प समस्त शत्रु सेना को कुचलने की इच्छा से एड़ी, पैर के अंगूठे और अंकुश से प्रहार करके बार-बार आगे बढ़ रहे थे। यह देखकर द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने उन पर नाराच नामक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
Those serpents desired to crush the entire enemy army and were being repeatedly urged forward by strikes with the heels, toes and goads. Seeing this, Dhrishtadyumna, the son of Drupada, began showering arrows called Narach on them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥