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mahabharat 8.22.28: जैसे वज्रों की वर्षा से पर्वत ढह जाते हैं, उसी प्रकार पाण्डव सैनिकों रूपी बादलों द्वारा फेंके गए बाणों की वर्षा से शत्रुओं के हाथी रूपी पर्वत भी घायल होकर ढह गए।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.22.28 
ते पाण्डुयोधाम्बुधरै: शत्रुद्विरदपर्वता:।
बाणवर्षैर्हता: पेतुर्वज्रवर्षैरिवाचला:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जैसे वज्रों की वर्षा से पर्वत ढह जाते हैं, उसी प्रकार पाण्डव सैनिकों रूपी बादलों द्वारा फेंके गए बाणों की वर्षा से शत्रुओं के हाथी रूपी पर्वत भी घायल होकर ढह गए।
 
Just as mountains collapse due to the shower of thunderbolts, similarly the mountains in the form of elephants of the enemies collapsed after being hit by the shower of arrows thrown by the clouds in the form of Pandava soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)