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mahabharat 8.22.27: तदनन्तर धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदी के पुत्र, प्रभद्रक तथा शिखण्डी ने भी उन महान् गजराजों पर अपने बाणों की वर्षा की। 27॥   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.22.27 
तत: पाञ्चालशैनेयौ द्रौपदेया: प्रभद्रका:।
शिखण्डी च महानागान् सिषिचु: शरवृष्टिभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदी के पुत्र, प्रभद्रक तथा शिखण्डी ने भी उन महान् गजराजों पर अपने बाणों की वर्षा की। 27॥
 
Thereafter, Dhrishtadyumna, Satyaki, Draupadi's sons, Prabhadrakas and Shikhandi also showered their arrows on those great Gajarajas. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)