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mahabharat 8.22.20-21: उन हाथियों पर ध्वजाएँ लहरा रही थीं। उनके मुख अत्यंत सुंदर थे। उन्हें बाँधने के लिए बनी रस्सियाँ और कवच सुनहरे रंग के थे। वे धधकते हुए पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे। मेकल, उत्कल, कलिंग, निषाद और ताम्रलिप्त देशों के योद्धा बड़ी उत्सुकता से बाणों और गदाओं की वर्षा कर रहे थे, उन हाथियों द्वारा नकुल को कुचलने के लिए। वे सभी उसे मार डालने पर तुले हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  8.22.20-21 
चलत्पताकै: सुमुखैर्हेमकक्षातनुच्छदै:।
मिमर्दिषन्तस्त्वरिता: प्रदीप्तैरिव पर्वतै:॥ २०॥
मेकलोत्कलकालिङ्गा निषधास्ताम्रलिप्तका:।
शरतोमरवर्षाणि विमुञ्चन्तो जिघांसव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उन हाथियों पर ध्वजाएँ लहरा रही थीं। उनके मुख अत्यंत सुंदर थे। उन्हें बाँधने के लिए बनी रस्सियाँ और कवच सुनहरे रंग के थे। वे धधकते हुए पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे। मेकल, उत्कल, कलिंग, निषाद और ताम्रलिप्त देशों के योद्धा बड़ी उत्सुकता से बाणों और गदाओं की वर्षा कर रहे थे, उन हाथियों द्वारा नकुल को कुचलने के लिए। वे सभी उसे मार डालने पर तुले हुए थे।
 
Flags were fluttering on those elephants. Their faces were very beautiful. The ropes and armour made to tie them were of golden colour. They looked like blazing mountains. The warriors of Mekal, Utkal, Kalinga, Nishad and Tamralipta countries were showering arrows and maces with great eagerness, wanting to crush Nakul with those elephants. All of them were hell-bent on killing him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)