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mahabharat 8.22.17: अंग देश के राजा ने नकुल पर सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी आठ सौ बाण छोड़े, किन्तु नकुल ने उनमें से प्रत्येक के तीन टुकड़े कर दिए।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.22.17 
दिवाकरकरप्रख्यानङ्गश्चिक्षेप तोमरान्।
नकुलाय शतान्यष्टौ त्रिधैकैकं तु सोऽच्छिनत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अंग देश के राजा ने नकुल पर सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी आठ सौ बाण छोड़े, किन्तु नकुल ने उनमें से प्रत्येक के तीन टुकड़े कर दिए।
 
The king of Angas shot eight hundred arrows, as radiant as the rays of the sun, at Nakula, but Nakula broke each of them into three pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)