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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.22.15 
विपताकं वियन्तारं विवर्मध्वजजीवितम्।
तं कृत्वा द्विरदं भूय: सहदेवोऽङ्गमभ्ययात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस हाथी से उसकी ध्वजा, महावत, कवच, ध्वज और प्राण छीनकर सहदेव पुनः अंगराज की ओर बढ़े।
 
Having thus deprived that elephant of its banner, mahout, armour, standard and life, Sahadeva again proceeded towards the king of Angas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)